खुशबू ने अरुण का हाथ थाम लिया। अरुण ने वियना की ओर हल्की मुस्कान के साथ देखा और कहा, “तुम इतना गुस्सा क्यों कर रही हो, वियना? खुशबू को देखो… वो तुमसे मिलने के लिए बेचैन थी। देखो आज वो दिन आ ही गया जब…
चीड़ के पेड़ों से सुनहले पराग हवा में बिखर रहे थे "अरे शाम हो गई अरुण अभी तक क्यों नहीं आया?" उसने आश्चर्य से भरकर कहा और पास की एक बेंच पर बैठ गई। वियना ने मन में कहा क्या आज अरुण लाइब्रे…
बुद्ध अगर एक शाम के लिए वापिस आ जाते तो मैं कहता कि आपके मार्ग पर चल रहे लोग बहुत खूबसूरत होते अगर मैं अपने भीतर के दुःख को समझ पाता। ऐसा लगता है कि इस धम्म के मार्ग की तस्वीर मेरे भीतर, दुखों के मल…
भाग 3 नवीन का सतसंग नवीन शहर जानें के लिए तैयार हो जाता है क्यों की आज शहर में बाबा जी का सतसंग लगने वाला है, और नवीन को सेवादारों की कॉल आई की तुम्हें आज सतसंग में आना है। नवीन सेवादारों से ना नहीं…
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